Talak Ke Bad Baccho Par Padne Vale Bure Prabhav : तलाक के बाद बच्चों पर पड़ने वाले बुरे प्रभाव
Talak Ke Bad Baccho Par Padne Vale Bure Prabhav : तलाक के बाद बच्चों पर पड़ने वाले बुरे प्रभाव - जब माता-पिता का तलाक होता है, तब बच्चों पर काफी
सारे बुरे प्रभाव पड़ते हैं। बच्चों की जिंदगी उन बाकी बच्चों जैसी नहीं होती है, जिनकी जिंदगी सामान्य
होती है। उन बच्चों पर काफी सारे मानसिक,
सामाजिक,
आर्थिक और भावनात्मक प्रभाव पड़ते है।
इसलिए आज हम आपको इस ब्लॉग में बताएंगे,
कि बच्चों पर कैसे और कौन-कौन से बुरे
प्रभाव पड़ते हैं।
1. माता पिता की कमी
जब किसी Couple का
तलाक होता है, तो सबसे अधिक प्रभाव बच्चों पर हीं पड़ता है। वे या तो माता के
साथ या फिर पिता के साथ रहते हैं। जब वे तलाक के बाद माता के साथ रहते हैं, तब उनको अपने पिता की
कमी महसूस होती है और जब पिता के साथ रहते हैं,
तो मां की कमी महसूस होती है। ऐसे में
उन्हें उनके माता या पिता की कमी हमेशा महसूस होती है और बड़े होने के बाद भी वे
अपने साथ यह बोझ लिए रहते हैं। यदि अपने माता या पिता की दूसरी शादी होती है, तो उनको उनके नए माता
या पिता के साथ भी सामंजस्य बनाने में काफी दिक्कत होती है और साथ ही उनको अपने
पुराने माता या पिता की बड़ी याद आती है।
2. आर्थिक प्रभाव
जब किसी Couple का
तलाक होता है, तब बच्चे या तो माता या फिर पिता के साथ रहते हैं। ऐसे में जो
बच्चे मां के पास रहे और उनकी मां की आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं हो, मां यदि हाउस वाइफ हो, मायके से ज्यादा
सपोर्ट ना मिले और साथ ही दूसरी परेशानियां भी हो,
तब बच्चो का भविष्य खतरे में पड़ सकता
है। बच्चों को रहने, खाने पीने, स्कूल कॉलेज का खर्च आदि की परेशानी होती है। उन्हें एक अच्छा
जीवन स्तर नहीं मिल पाता है, जितना दूसरे बच्चों को मिलता है।
साथ ही यदि बच्चे पिता के पास रहे और
उनकी भी आर्थिक स्थिति ठीक नहीं हो,
तब भी उनका भविष्य खतरे में पड़ सकता
है। अकेले पिता द्वारा बच्चों को पालना भी बड़ा मुश्किल होता है। मां द्वारा जैसा
ध्यान बच्चों का रखा जाता है, वैसा पिता नहीं रख सकता है।
3. माता या पिता की दूसरी शादी के बाद प्रभाव
Couple के तलाक के बाद जब बच्चे माता या पिता के साथ रहते हैं और माता
या पिता की जब दूसरी शादी होती है,
तब उन्हें या तो नई सौतेली माता या नए
सौतेले पिता मिलते हैं। तब उन बच्चों पर अपने नए माता या पिता का बहुत गहरा प्रभाव
पड़ता है। वह अपने नए माता या पिता को अपनाने में कतराते हैं। उन्हें नए माता या
पिता की जगह अपने असली माता या पिता की याद आती है। साथ ही कभी-कभी ऐसा भी होता है, कि नहीं माता या पिता
उन बच्चों से अच्छा व्यवहार नहीं करते है,
उनसे बुरा बर्ताव करते हैं, उन्हें पसंद नहीं
करते, टॉर्चर करते हैं।
ऐसे में बच्चों के लिए माता-पिता का
तलाक किसी बुरे सपने से कम नहीं होता है।
4. भविष्य खतरे में
जब किसी बच्चे के माता-पिता का तलाक
होता है, तब उनका भविष्य खतरे में पड़ जाता है। जब वे माता के साथ रहते
है और मायके वालों की या माता की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं होती है, तो उनकी पढ़ाई लिखाई
में दिक्कत आती है। जब बचपन में पढ़ाई अच्छी नहीं हो पाती, तब बड़े होने पर भी
शिक्षा अच्छी नहीं मिल पाती हैं और उनका करियर खतरे में पड़ जाता है। साथ ही जब
अपनी मनपसंद और बड़ी शिक्षा प्राप्त नहीं कर पाते,
तब भी उनका भविष्य खतरे में पड़ जाता
है।
5. मानसिक और सामाजिक प्रभाव
तलाक का बच्चों पर काफी ज्यादा मानसिक
और सामाजिक प्रभाव पड़ता है। बच्चों को समाज के लोगों द्वारा काफी बुरी नजर से
देखा जाता है। उन्हें लोग ऐसे देखते हैं और समझते हैं, जैसा कि किसी बुरे
व्यक्ति या दोषी व्यक्ति के बच्चे हैं और वह उन्हें हीन भावना से देखते हैं।
साथ ही बच्चों पर माता-पिता के तलाक का
काफी बड़ा मानसिक प्रभाव पड़ता है। माता-पिता के अलग होने का तनाव, माता या पिता से अलग
रहने का तनाव, आर्थिक तनाव, माता-पिता की चिंता,
लोगों द्वारा किए गए व्यवहार का तनाव
आदि कई प्रकार के मानसिक प्रभाव पड़ते हैं।
ऐसे में बच्चों पर तलाक के कई सारे
प्रभाव पड़ते हैं और उनका जीवन बहुत कठिनाई से गुजरता है।
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